Sunday, 28 July 2013

आज नहीं तो कभी नहीं


अभी भी नहीं तो फिर कब

आप नहीं तो और हो कौन

सुख आपके दुःख भुगते कौन

देश नहीं तो किसके लिए

बोलना नहीं मौन हो क्यों

कष्ट हमारे निवारण किसका

यहाँ नहीं तो और जाएँ कहाँ

लड़ाई आपकी परिणाम किसे

व्यथा तो है दुर्दशा किसकी

चिंता समय की बेबस कौन

नींद की चाह सोये कोई कैसे

खुली आंख पर सपने किसके

द्वन्द मन का तो युद्ध कहाँ

बदलाव चाहिए बदले कैसे

खुद का युद्ध लडेगा कौन

हिम्मत आपकी साथ सबका

अब परिवर्तन रोकेगा कौन

नया सवेरा ला अंधकार मिटा

ये प्रयास आपका करेगा कौन?? 

2 comments:

  1. Adbhut evam adwitiya aavhaan ek nutan desh seva ke parishram ki jisme paarishramik bhi, swyam, taye karenge...Prashn yahi ki is jung me, agrani kaun?

    Bahut sundar Maate.

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